हिंडौन सिटी, करौली । भारत विकास परिषद राजस्थान पूर्व की प्रांतीय बैठक को कृष्णा रिसोर्ट, बाड़ी में सम्पन्न हुई, जिसमें 6 जिलों की 18 शाखाओं ने भाग लिया । शाखा हिंडौन सिटी को उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए दो सर्वोच्च सम्मान प्रदान किए। यह उपलब्धि शाखा एवं समस्त नगरवासियों के लिए गर्व एवं प्रेरणा का विषय है।बैठक में रीजनल संयुक्त महासचिव डॉ. शिवदत्त मंगल, राष्ट्रीय गतिविधि सदस्य (संपर्क) हरिप्रसाद शर्मा, रीजनल महिला संयोजिका मीना शर्मा एवं प्रांतीय अध्यक्ष हर्षवर्धन शर्मा की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित हुआ। मंच संचालन प्रांतीय महासचिव हेमंत गर्ग ने किया।
शाखा अध्यक्ष उपेन्द्र गुप्ता एवं सचिव दीनदयाल सिंहल ने बताया कि बैठक में प्रांतीय संरक्षक निरंजन शर्मा, प्रांतीय गतिविधि संयोजक (सेवा) देवेंद्र शर्मा, “भारत को जानो” प्रकल्प संयोजक वर्धमान जैन, शाखा समन्वयक सुबोध जैन, शाखा गतिविधि संयोजक (संस्कार) अशोक गुप्ता तथा शाखा महिला संयोजिका वंदना शर्मा ने भाग लिया।
सर्वाधिक रक्तदान शिविर आयोजन का सर्वोच्च सम्मान
हिंडौन शाखा द्वारा वर्षभर में सर्वाधिक 6 रक्तदान शिविरों का आयोजन किया इनमें 365 यूनिट रक्त का संग्रहण हुआ। शाखा ने सतत जनजागरण, सुव्यवस्थित आयोजन एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से रक्तदान हेतु जागरूकता का स्वरूप प्रदान किया। इस मानवीय सेवा कार्य के लिए शाखा को प्रांत स्तर पर सर्वोच्च सम्मान से अलंकृत किया गया।
हिंडौनसिटी में करौली रोड स्थित मोक्षधाम मुख्य सड़क स्तर से लगभग 3 फीट नीचे होने के कारण वर्षा ऋतु में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई है, जिससे अंतिम संस्कार के समय परिजनों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए शाखा द्वारा भामाशाहों के सहयोग से मोक्षधाम के विकास एवं सौंदर्यकरण एवं संरचनात्मक सुधार का कार्य किया जा रहा है। जल निकासी व्यवस्था, भूमि समतलीकरण तथा आवश्यक सुविधाओं के उन्नयन की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस सराहनीय पहल के लिए शाखा को प्रांत की सर्वश्रेष्ठ शाखा के रूप में सम्मानित किया गया।
प्रांतीय पदाधिकारियों ने हिंडौन शाखा की सेवा भावना, संगठनात्मक क्षमता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए अन्य शाखाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।
शाखा अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों ने इन उपलब्धियों को समस्त कार्यकर्ताओं, मातृशक्ति, भामाशाहों एवं नगरवासियों के सामूहिक सहयोग का परिणाम बताते हुए भविष्य में भी “सेवा, संस्कार और समर्पण” की भावना के साथ जनहित के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
